उरई। जनपद में संभावित बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कलेक्ट्रेट सभागार में फ्लड स्टियरिंग ग्रुप की बैठक कर वर्ष 2026 की बाढ़ प्रबंधन कार्य योजना की समीक्षा की तथा सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए।
बैठक में बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना, राहत एवं बचाव कार्य, नाव-मोटरबोट और गोताखोरों की उपलब्धता, जल निकासी के लिए पंपों की व्यवस्था, खाद्यान्न, पशुचारा, दवाइयों, पेयजल एवं विद्युत आपूर्ति सहित विभिन्न व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी विभाग 15 मई तक आवश्यक सामग्री की निविदाएं पूरी कर लें तथा आपदा की स्थिति में तत्काल राहत कार्य शुरू किए जाएं।
अपर जिलाधिकारी के नियंत्रण में जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा, जहां 24 घंटे कर्मचारियों की ड्यूटी रहेगी। वहीं बेतवा नहर प्रखंड प्रथम उरई कार्यालय में 15 जून से 15 अक्टूबर तक पृथक बाढ़ नियंत्रण कक्ष संचालित रहेगा। तहसील स्तर पर भी आवश्यकतानुसार नियंत्रण कक्ष बनाए जाएंगे।
बैठक में बताया गया कि जनपद की पांचों तहसीलों के 1155 गांवों में से 158 गांवों को संभावित बाढ़ एवं जलभराव प्रभावित श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इन क्षेत्रों में 27 बाढ़ चौकियां स्थापित की जाएंगी। कालपी तहसील के 35, उरई के 31, कोंच के 33, माधौगढ़ के 38 तथा जालौन तहसील के 21 गांव प्रभावित श्रेणी में शामिल हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि यमुना एवं बेतवा नदियों के जलस्तर की प्रतिदिन निगरानी की जाएगी और खतरे के निशान के करीब पहुंचते ही राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को सड़कों एवं पुलों की मरम्मत, कटान रोकने के उपाय तथा बाढ़ शरणालयों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व संजय कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीरेंद्र सिंह, अधिशाषी अभियंता सिंचाई धर्म घोष सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
रिपोर्ट-अमित कुमार पत्रकार जनपद जालौन।

