उरई (जालौन)। जिला मुख्यालय उरई स्थित मेडिकल कॉलेज परिसर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा मेगा विधिक साक्षरता एवं सेवा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी एवं न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे। जनपद के अलग-अलग गांवों से आए लोगों ने विभागीय स्टॉलों पर पहुंचकर योजनाओं की जानकारी प्राप्त की तथा अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आवेदन प्रस्तुत किए।कार्यक्रम के दौरान दलित सम्मान व न्याय केंद्र की टीम द्वारा न्याय प्राप्त करने वाले पीड़ितों की ओर से संजना देवी एवं विजय कुमार ने ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में जनपद न्यायाधीश, जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, प्रथम अपर जिला जज तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव को भारत के संविधान की प्रस्तावना भेंट कर आभार व्यक्त किया।
शिविर में प्रयास संस्था–दलित सम्मान व न्याय केंद्र द्वारा संचालित “न्याय तक पहुँच अभियान” का भी स्टॉल लगाया गया। संस्थापक एडवोकेट कुलदीप कुमार बौद्ध ने अभियान की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में 87 दलित अत्याचार, 17 पॉक्सो तथा 45 महिला हिंसा/दहेज उत्पीड़न के मामलों में पैरवी कर पीड़ितों को न्याय दिलाया गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि जनपद की पांच तहसीलों—उरई, कालपी, जालौन, माधौगढ़ और कोंच—की 160 पंचायतों में 205 पैरालीगल चैंपियन एवं दलित मानवाधिकार रक्षक तैयार किए गए हैं। साथ ही 82 युवाओं को विधिक एवं नेतृत्व प्रशिक्षण दिया गया, 56 गंभीर मामलों में फैक्ट फाइंडिंग की गई तथा 44 जागरूकता शिविरों के माध्यम से 1861 पीड़ितों एवं समुदाय के लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता और विभिन्न सरकारी योजनाओं से लाभान्वित कराया गया।
एडवोकेट कुलदीप कुमार बौद्ध ने कहा कि संगठन का उद्देश्य प्रत्येक पीड़ित को सम्मानपूर्ण न्याय दिलाना और समाज के कमजोर वर्गों को कानूनी रूप से सशक्त बनाना है। कार्यक्रम में अधिवक्ता रश्मि वर्मा, निकहत परवीन, किरण मेहरा, अजय सिंह, अनुराधा बौद्ध, प्रदीप सिंह, उषा देवी, स्नेहराजा, देवेन्द्र, अनिल, आयुष कुमार, सचिन चौधरी, सुरेंद्र कुमार, विजय कुमार, संजना सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।