मुहम्मदाबाद,जालौन । हजरत फरीदुद्दीन गंजे रवा उर्फ सरकने पीर शाह बाबा के दो दिवसीय उर्स का समापन बृहस्पतिवार देर रात शानदार कव्वाली मुकाबले के साथ हुआ। मुंबई की मशहूर कव्वाल गुलनाज वारसी और बरेली के कव्वाल शादाब निराला के बीच हुए मुकाबले में एक से बढ़कर एक सूफियाना कलाम पेश किए गए, जिन्हें सुनकर अकीदतमंद रातभर झूमते रहे। वहीं दरगाह शरीफ पर लोगों ने फातिहा पढ़कर मुल्क में अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुरआन पाक की तिलावत से हुआ। इसके बाद कव्वाली मुकाबला शुरू हुआ। सबसे पहले शादाब निराला ने अपने कलाम “हमको न कोई गैर सहारा बचाएगा, हमको अली के नाम का सहारा बचाएगा” पेश कर महफिल में रंग जमा दिया। इसके जवाब में गुलनाज वारसी ने “जगह की कोई कैद नहीं, कोई कहीं बैठे, जहां मकाम था हम वहीं बैठे” कलाम सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। देशभक्ति से ओतप्रोत कलाम “पड़ोसी देश हमारी तरफ घूर के मत देखना, हम हिंदुस्तानी हैं” पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं। इस दौरान जालौन से आए रईस राइन और संजय गौतम ने कव्वालों को नजराना पेश कर उनका उत्साहवर्धन किया। रातभर चले मुकाबले में दोनों कव्वालों ने सूफी, धार्मिक और देशभक्ति से जुड़े कलाम पेश किए। बेहतरीन प्रस्तुति से प्रभावित होकर अंसार हुसैन, आमिर, शशि राजपूत, सलीम हुसैन, जावेद अख्तर और मुजाहिद खान सहित अन्य लोगों ने कव्वालों का फूल-मालाओं से स्वागत किया। शुक्रवार सुबह दरगाह शरीफ पर गुस्ल और फातिहा की रस्म अदा की गई। इसके बाद अकीदतमंदों के बीच तबर्रुक (प्रसाद) वितरित किया गया। उर्स में आए अतिथियों का कमेटी की ओर से पगड़ी बांधकर स्वागत किया गया। संचालन पप्पू थापा और नवाब अली ने किया।
इस अवसर पर तालिब हुसैन, तारिक अली, गुफरान, लालू शेख, मोनिश, अंसार हुसैन, रमजान, जुबैर शाह, हाजी नियामत सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। कमेटी की ओर से जावेद अख्तर और आगोश खान ने अतिथियों का स्वागत किया।
रिपोर्ट-अमित कुमार पत्रकार जनपद जालौन उत्तर प्रदेश।

