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  • राजधानी लखनऊ में शुभ अवसरों पर विज्ञापन एवं बधाई सन्देश देने के लिए सम्पर्क करे-8299589254 निखिल श्रीवास्तव संवाददाता–लखनऊ,पूरे उत्तर प्रदेश में शुभ अवसरों पर विज्ञापन एवं बधाई सन्देश देने के लिए सम्पर्क करे-9415596496 -9935930825 -पूरे बुन्देलखण्ड शुभ अवसरों पर विज्ञापन एवं बधाई सन्देश देने के लिए सम्पर्क करे-अशफाक अहमद बुन्देलखण्ड व्यूरो-मो-9838580073 -जनपद जालौन में शुभ अवसरों पर विज्ञापन एवं बधाई सन्देश देने के लिए सम्पर्क करे-रंजीत सिंह-मो-8423229874,श्यामजी सोनी मो-9839155683,अमित कुमार मो-7526086812,जनपद झाँसी में शुभ अवसरों पर विज्ञापन एवं बधाई सन्देश देने के लिए सम्पर्क करे-अरुण वर्मा मो-9455650524-जनपद आजमगढ़ में शुभ अवसरों पर विज्ञापन एवं बधाई सन्देश देने के लिए सम्पर्क करे-रामानुजाचार्य त्रिपाठी मो-9452171219-जनपद कानपुर देहात में शुभ अवसरों पर विज्ञापन एवं बधाई सन्देश देने के लिए सम्पर्क करे-मनोज कुमार सिंह मो-9616891028-

यूपी में तीन दिन का राजकीय शोक

उत्तर प़देश की राजधानी लखनऊ की आन बान शान के प़तीक मध्य प्रदेश के राज्यपाल व बिहार के पूर्व राज्यपाल लाल जी टंडन बाबू जी हम सब के बीच आज नही रहे।
लखनऊ के मेदांता अस्पताल में लगभग एक माह से बाबू जी का उपचार चल रहा था।मंगलवार को सुबह निधन हो गया।
चौक की गलियों से लेकर लखनऊ के हर नुक्कड़ तक आज सन्नाटा पसरा है। हर कोई  बाबू जी के निधन से स्तब्ध है, सन्न है,मायूस हैै। बाबू जी का राजनीतिक सफर सभासद से एमएलसी विधायक मंत्री नेता प़तिपक्ष सांसद तक रहे है।

यह विधि का विधान कहें या दुर्भाग्य। उत्तर प़देश से जो राजनेता मध्य प्रदेश का राज्यपाल बना, उसके लिए यह पद दुर्भाग्यशाली रहा।
लालजी टंडन तीसरे ऐसे राजनेता रहे जिनका मध्य प्रदेश के राज्यपाल रहते हुए निधन हो गया।
इससे पहले रामप्रकाशगुप्ता और रामनरेश यादव भी मध्य प्रदेश के राज्यपाल थे। इनका निधन उनके इस पद पर रहते हुए हुआ था। वहीं यह दोनो लोग उत्तर प़देश के मुख्यमंत्री पद पर भी रहे।
हालांकि लाल जी टंडन जी मुख्यमंत्री नही थे,लेकिन मुख्यमंत्री पद के लिए इनका भी नाम कई बार सुर्खियों में रहा।


बाबू जी खुद मुख्यमंत्री भले ही ना बन पाए हों लेकिन बसपा प़मुख मायावती को मुख्यमंत्री बनाने में बाबू जी की अहम भूमिका रही है। तभी तो बाबू जी को अपना भाई मानकर मायावती उनकी कलाई पर कुछ दिनों तक  चांदी की राखी बांधती थीं।


।वही पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी जी से भी बाबू जी का खास संबंध रहे है ।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने ने लालजी टंडन को श्रद्धांजलि अर्पित की

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मध्य प्रदेश के राज्यपाल  लाल जी टंडन के अंतिम दर्शन हेतु लखनऊ के चौक स्थित उनके आवास पहुंचें
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने
लालजी टण्डन के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी साथ ही श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री लालजी टण्डन के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री ने मध्य प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री लाल जी टंडन जी के निधन पर शोक व्यक्त किया

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री, श्री सूर्य प्रताप शाही ने मध्य प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री लाल जी टंडन जी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ईश्वर से पुण्य आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की कामना की। उन्होंने शोक संतप्त परिजनों को यह दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

श्री शाही ने अपने शोक संदेश में कहा कि स्व0 टण्डन जी का सम्पूर्ण जीवन जनता की सेवा को समर्पित रहा। वह अत्यंत सरल एवं जनप्रिय नेता थे। उन्होंने कहा कि स्व0 टण्डन जी के निधन से राजनीतिक जगत की अपूरणीय क्षति हुई है।

उत्तर प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष श्री हृदय नारायण दीक्षित ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल, श्री लालजी टण्डन के निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है।
श्री दीक्षित ने कहा कि श्री लालजी टण्डन मेरे संरक्षक थे। उनका मेरे ऊपर सदैव स्नेह भाव रहा है। उन्होंने श्री लालजी टण्डन के निधन को अपनी व्यक्तिगत क्षति बताया।
श्री अध्यक्ष ने कहा कि श्री लालजी टण्डन एक जनप्रिय नेता थे। संसदीय प्रतिभा के धनी थे। उनका संसदीय कौशल विधान सभा व लोकसभा में सदैव याद किया जायेगा।
उन्होंने अपनी राजनैतिक जीवन की शुरूआत जनसंघ के एक साधारण कार्यकर्ता से प्रारम्भ की। जनसंघ को लखनऊ में लोकप्रिय बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वे पं0 दीनदयाल उपाध्याय के निकट थे। डा0 राममनोहर लोहिया सहित वाम विचार के नेताओं से भी उनकी मित्रता थी। वे सहज सरल व्यक्तित्व के धनी थे। 1996 के मध्याविधि चुनाव में प्रथम बार, फरवरी 2002 में दूसरी बार तथा अप्रैल-मई 2007 के सामान्य निर्वाचन में तीसरी बार लगातार भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर ही आप विधान सभा के सदस्य निर्वाचित हुए। 1978 से 1984 तक तथा 1990 से अक्टूबर 1996 तक भारतीय जनता पार्टी से विधान परिषद के सदस्य भी रहे। वर्ष 1991 में प्रथम बार श्री कल्याण सिंह के मंत्रिमण्डल में ऊर्जा मंत्री के रूप में सम्मिलित हुए। तदोपरांत सुश्री मायावती, श्री रामप्रकाश एवं श्री राजनाथ सिंह के मंत्रिमण्डल में विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री के रूप में रहे। मई 2007 में नेता विपक्ष के रूप में अपना दायित्व निभाया। वह लखनऊ में अटल जी के बाद सांसद चुने गये। इसके उपरांत बिहार एवं मध्यप्रदेश के राज्यपाल के रूप में अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन किया।
उनके निधन से पूरे राजनीतिक क्षेत्र को सदमा पहुंचा है। उनके कार्यकर्ताओं के प्रति प्यार, स्नेह, एवं सदैव सहयोगी स्वभाव मस्तिष्क पटल से भुलाये नहीं भुलेगी।
श्री दीक्षित ने श्री टण्डन के ज्येष्ठ पुत्र श्री आशुतोष टण्डन, मा0 मंत्री नगर विकास सहित उनके अन्य परिवार के सदस्यों को इस संकट की घड़ी में सांत्वना प्रदान करते हुये दिवंगत आत्मा के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

व्यूरो रिपोर्ट:देवेन्द्र प्रताप सिंह soni news लखनऊ

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