पढ़कर चौंकिए मत। और यह आम लोगों के लिए हैं भी नहीं, इसका उपयोग साधारण लोग कर भी नहीं पायेंगे, हाँ चिकित्सक व साधु   इसे समझते है और करते भी है। इसे अतियोग चिकित्सा भी कह सकते है, पर बालक व अधैर्य लोग इससे दूर ही रहे!
इस विषय पर ध्यान मेरा  इस कारण हुआ जब सर्दियों में साधुओं को गंगा स्नान करते देखा जी हाँ सर्दियों में जब कि साधारण लोग दो मिनट गर्मियों में हरि की पैड़ी पर स्नान में ही काँप जाते है। और दूसरा कारण सबसे अधिक मूली सर्दियों में ही खायी जाती है।

Maxresdefault

    सर्दियों के मौसम में साधारण तौर पर होने वाले सर्दी  जुकाम में केवल उपचार मूली और नीबू से कर सकते हैं।

शरीर में तीनो दोष (कफ, वात और पित्त) जब तक संतुलित है, तब तक शरीर स्वस्थ रहता है, पर किसी कारण बस एक या दो दोष की अधिकता हो गयी तो शरीर में विकार उत्पन्न कर देता हैं। और यही विकार ही सर्दी – जुकाम कफ का कारण बनता है।

   दूसरी बात हमने बार बार कहा है कि भोजन से महत्वपूर्ण है भोजन का पचना।  हम जो खाते हैं यदि उसे अच्छी तरह पचा नहीं पायेंगे तो आम दोष उत्पन्न होगा। आजकल पर्याप्त शारीरिक श्रम या व्यायाम का अभाव इस आम दोष का मुख्य कारण है। अतः जब यह आम शरीर में कफ का बहुत बड़ा कारण है, पर हमारा शरीर इसे एक निश्चित मात्रा तक ही एकत्र कर पाता  है। जब इसकी मात्रा असंतुलित हो जाती है तो शरीर नहीं संभाल पाता और यह एक सीमा से अधिक हो जाने पर शरीर अचानक ठण्ड लगने पर या किसी अन्य कारणों से इसको मल, नाक और गले के रास्ते से बाहर निष्काषित करने लगता है।  जिसे हम जुकाम कहते हैं।

इससे यह स्पष्ट होता है कि जुकाम वास्तव में कोई बीमारी नहीं है, अपितु हमारे शरीर को त्रिदोष को संतुलित करने की एक व्यवस्था है। जब शरीर अनावश्यक कफ को मुक्त से करने का प्राकृतिक प्रयास करता है तो हम इस कफ को रोकने के लिए दवायें लेना शुरू कर देते हैं जबकि हमें इसे निकालने में प्रकृति की सहायता करनी चाहिए जिससे हम अति शीघ्र जुकाम से मुक्ति पा सकते हैं।

यहाँ कुछ लोगों को मल के कफ और सर्दी – जुकाम में भ्रम होगा वह त्रिदोष के कफ के लेख को पढ़ें

    आपने देखा होगा कि सर्दी – जुकाम होते ही सबसे पहले हमें कफ पैदा करने वाली चीजें जैसे – चिकनाई, मैदा, तली हुई चीजें, दही, बाजारू फ़ास्ट फ़ूड आदि को बंद करने की सलाह दी जाती है।  तथा साथ ही नाक या गले से निकलने वाले कफ को रूमाल से पोंछकर साफ़ करने की नमक पानी से गरारे करने की सलाह दी जाती है। कभी भी भूलकर कफ को बढ़ाने या उन्हें वापस अन्दर खींचने वाली कोई भी गलती ना करे। तीन से 5 दिनों में ज्यादा से ज्यादा निकलेगा, और आप धीरे धीरे स्वस्थ होते चले जायेंगे। जब  अनावश्यक कफ निकल जाता है तो जुकाम अपने आप बंद हो जाता है और शरीर एकदम स्वस्थ हो जाता है।

    जो लोग दवायें खाकर कफ को निकलने से रोकते है उन्हें पता नहीं कि वह कफ नहीं रोक रहे बल्कि ब्रोंकाइटिस, दमा, एलर्जी, लकवा, पथरी, किडनी, गठिया रोग, ब्लडप्रेशर जैसे अनेक रोगों को पैदा करने का निमंत्रण दे रहे हैं। इसलिए भूलकर भी जुकाम में कोई दवा नहीं लेनी चाहिए।

 ज्वर, सर्दी – जुकाम, दस्त, आँख का आना, उल्टी यह हमारे मित्र रोग है, अतः इसमें उल्लंघन करें, उपवास करे।

   अब कफ सरलता से कैसे  निकले इसके लिए सुबह – सुबह सूर्योदय के बाद ताजा मूली सलाद के रूप में सेवन करें। मूली में प्राकृतिक फाॅलिक एसिड होता है जो कफ को पलता करके धीरे – धीरे शरीर से बाहर निकाल देता है, पर ध्यान रहे रात में  मूली का सेवन न करें। क्योंकि इसमें आयरन होता है और सोने के बाद इसको पचाने में शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा देनी पड़ती है।।

    हल्के गुनगुने पानी में ताजा नीबू रस पीना लाभदायक होता है। और कोई भी खट्टी चीज खाएंगे हो सकता है आपका कफ बढ़ जाए, लेकिन नीबू में प्राकृतिक साइट्रिक एसिड होने के कारण यह कफ को सरलता से निकाल देता है। नीबू में मौजूद विटामिन “सी” शरीर को रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में बेहद प्रभावी है, इसीलिए आपने देखा होगा कि डॉक्टर विटामिन सी गोलियां देते हैं।