झांसी। सामाजिक समरसता और सामूहिक सहयोग की भावना को साकार करते हुए वाल्मीकि समाज सेवा समिति द्वारा आठवें सामूहिक आदर्श विवाह सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम किला रोड स्थित मुक्ताकाशी मंच पर रविवार, 22 फरवरी 2026 को संपन्न हुआ, जिसमें 12 जोड़े वैदिक मंत्रोच्चार और हिंदू रीति-रिवाजों के साथ परिणय सूत्र में बंधे।
समारोह का वातावरण पारंपरिक सजावट, फूलों की रंगीन झालरों और मंगल गीतों से गुंजायमान रहा। विवाह मंडप में एक साथ बैठे वर-वधू ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए और जीवनभर साथ निभाने की प्रतिज्ञा की। सामूहिक विवाह के इस आयोजन ने सामाजिक एकता और सहयोग की मिसाल पेश की।
कार्यक्रम में सदर विधायक रवि शर्मा एवं संदीप सरावगी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि सामूहिक विवाह सम्मेलन समाज में आपसी भाईचारा, सहयोग और सादगीपूर्ण विवाह की परंपरा को बढ़ावा देता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी सम्मानपूर्वक अपने बच्चों का विवाह संपन्न कराने में सहायता मिलती है।
यह पूरा आयोजन संस्था के मुख्य संस्थापक एवं अध्यक्ष रमेश चंद्र महर्षि के मार्गदर्शन और आदेशानुसार सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि समिति का उद्देश्य समाज में शिक्षा, संस्कार और सामाजिक उत्थान को बढ़ावा देना है।
विवाह सम्मेलन को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। अध्यक्ष सरमन महंत, महामंत्री अमित नरवारे, संरक्षक कल्लू भारती, पूर्व अध्यक्ष प्रशांत गोलू, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महाराज सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों—विमल, बादशाह, राहुल चंडारिया, वीरू भारती, दीपक चावरे, अरविंद झांझोट (महासचिव), सचिन कागरे, शशिकांत सिगौते, नरेंद्र चौटेले और संदीप नाहर—ने आयोजन की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई।
मंच का सफल संचालन कोषाध्यक्ष शेखर नलवंशी ने किया, जबकि संयोजन मंत्री अनिल वाल्मीकि ने कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी अतिथियों, सामाजिक संगठनों एवं जनसमूह का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर वाल्मीकि समाज के वरिष्ठ नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद प्रदान किया। आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सादगीपूर्ण और सामूहिक विवाह समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
समारोह शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ और अंत में सभी के लिए प्रसाद एवं भोजन की व्यवस्था की गई। यह आयोजन सामाजिक एकता, सहयोग और सेवा भावना का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा।

