सदभावना एकता मंच पर 4 दर्जन कवियों ने किया कविता पाठ

प्राण प्रतिष्ठा समारोह के रंग में रंग गया कवि सम्मेलन
उरई. जिला प्रशासन के सहयोग से मकर संक्रांति के अवसर पर सदभावना एकता मंच ने टाउन हॉल के खुले मैदान में विशाल कवि सम्मेलन का आयोजन किया. इस अवसर पर जुटे लगभग 4 दर्जन कवियों ने कविता पाठ किया. अयोध्या में होने जा रहे राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की युद्धस्तरीय तैयारियों के माहौल में यहां भी कवियों पर राम भक्ति का रंग चढ़ा नजर आया.


वरिष्ठ कवि और अधिवक्ता यज्ञदत्त त्रिपाठी की अध्यक्षता और माया सिंह के संचालन में हुए इस कवि सम्मेलन का शुभारंभ भाजपा की जिलाध्यक्ष उर्विजा दीक्षित,अपर जिलाधिकारी संजय कुमार और सिटी मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार ने संयुक्त रुप से मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रजज्वलन कर किया.इसके बाद प्रियंका शर्मा ने सरस्वती वंदना गायी.


काव्य पाठ के दौरान जब सीता खरे ने दहेज़ लोलुपों पर चोट करते हुए कहा -कहीं कुछ और छिपी आपकी ख्वाहिश तो नहीं, देखने आये हो लड़की हूं नुमायश तो नहीं तो तालियों से वातावरण गुंजायमान हो उठा.अनुष्का यादव ने पढ़ा प्रभू राम बनने की चाह सभी में है, क्या उन जैसे बन सकोगे.अरुण प्रताप सिंह राजू ने पढ़ा -जाता है दिसम्बर तब आती है जनवरी, दिखती धरा पर फसलें हरी भरी, शिरोमणि सोनी ने पढ़ा -सज गयी अयोध्या राघवजी आये, भक्तों के दिल में फूल खिलाये.शिखा गर्ग ने सुनाया -जिन बेटों के लिए भ्रूण हत्याएं तू करवाता है, कौर छीन बेटी के मुंह से बेटा को खिलवाता है बेटा वही तुमको वृद्धाश्रम में पहुंचाता है.हास्य कवि मुकरी, डॉ रेनू चंद्रा, वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा, वीरेंद्र तिवारी, जाने माने शायर शफीकुर्र हमान कशफी, अनुज भदौरिया,सिद्धार्थ त्रिपाठी, अभिषेक सरल, गरिमा पाठक,महेश प्रजापति,इंदु विवेक, प्रिया दिव्यम, डॉ रविकांत शाक्य, विमला तिवारी, पत्रकार संजय गुप्ता, संजय शर्मा, विवेकानंद श्रीवास्तव, प्रियंका गुप्ता, शशि सोमेन्द्र सिंह, बाल कवि अक्षत सिंह, प्रगति मिश्रा राजीव थापक और जिला प्रोबशन अधिकारी अमरेंद्र पौतस्यायन आदि की रचनाओं ने भी श्रोताओं को मन्त्र मुग्ध कर दिया, समापन सत्र के मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी भीम जी उपाध्याय ने कवियों को शाल उढ़ाने के बाद शील्ड और प्रमाणपत्र दे कर सम्मानित किया.

सदभावना एकता मंच के अध्यक्ष लक्ष्मण दास बाबानी ने सभी का आभार जताया. अन्य पदाधिकारियों में युद्ध वीर सिंह कंथरिया, अलीम सर, डॉ ममता स्वर्णकार, संरक्षक हाज़ी अकील आदि ने भी आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान किया.

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