उरई (जालौन)।सरकारी दफ्तरों में अक्सर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों और विभागीय कार्यों में व्यस्त नजर आते हैं, लेकिन जालौन की आरटीओ प्रशासन अधिकारी सौम्या पाण्डेय ने व्यस्त कार्यशैली के बीच इंसानियत और संवेदनशीलता की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा अब जनपद में हो रही है। उन्होंने एक 11 वर्षीय जरूरतमंद बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का बीड़ा उठाया है, जो मजबूरी में चाय बेचकर अपना गुजारा कर रहा है।
आरटीओ कार्यालय के आसपास आने-जाने के दौरान सौम्या पाण्डेय की नजर सोएब नाम के एक बच्चे पर पड़ी। महज 11 वर्ष की उम्र में वह हाथ में चाय की केतली लेकर कार्यालयों और आसपास की दुकानों पर चाय पहुंचाता था। बताया गया कि वह पांच रुपये में चाय बेचकर अपनी जरूरतें पूरी करने का प्रयास करता है।
बच्चे से बातचीत के दौरान जब आरटीओ अधिकारी ने उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा तो उसकी परिस्थितियों की जानकारी सामने आई। सोएब ने बताया कि उसकी मां का निधन हो चुका है, जबकि पिता ने दूसरी शादी कर ली और उसे अपने साथ नहीं रखते। वर्तमान में वह अपनी मौसी और मौसा के साथ रह रहा है। पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उसकी पढ़ाई छूट गई और उसे कम उम्र में ही काम करना पड़ रहा है।
बच्चे की स्थिति जानकर सौम्या पाण्डेय ने उसे केवल सहानुभूति नहीं दी, बल्कि शिक्षा से जोड़ने की पहल की।
उन्होंने सोएब को अपने कार्यालय में बुलाया और पढ़ाई के लिए रजिस्टर के साथ ‘ज्ञान गंगा’ पुस्तक उपलब्ध कराई। उन्होंने बच्चे से कहा कि वह नियमित रूप से आरटीओ कार्यालय आए और समय निकालकर पढ़ाई करे।
इसके बाद सोएब ने भी अधिकारी की बात को गंभीरता से लिया और नियमित रूप से कार्यालय पहुंचकर पढ़ाई करने लगा। सौम्या पाण्डेय अपने विभागीय कार्यों के बीच समय निकालकर उसे पढ़ाती हैं, पढ़ाई से जुड़े सवाल समझाती हैं और उसे होमवर्क भी देती हैं।
सोएब के लिए यह बदलाव किसी नई शुरुआत से कम नहीं है। बच्चे ने बताया कि आरटीओ मैडम उसे बहुत प्यार से पढ़ाती हैं और पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करती हैं।उसके जन्मदिन पर भी सौम्या पाण्डेय ने उसे केक के लिए पैसे देकर उसका उत्साह बढ़ाया।बच्चे की मासूमियत उस समय भी सामने आई जब उसने कहा कि मैडम के पढ़ाने के बाद अब लोग उसकी चाय भी ज्यादा लेने लगे हैं। उसके चेहरे की खुशी यह बताने के लिए काफी है कि किसी जरूरतमंद बच्चे के जीवन में छोटी-सी मदद भी कितनी बड़ी उम्मीद बन सकती है।
आरटीओ प्रशासन अधिकारी सौम्या पाण्डेय की यह पहल महज एक बच्चे को पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश देती है कि जिम्मेदारी के पद पर रहते हुए भी समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए संवेदनशीलता और मानवीयता को प्राथमिकता दी जा सकती है।
उन्होंने सोएब को आर्थिक सहायता देने के बजाय उसे शिक्षा की राह से जोड़ने पर जोर दिया, जो उसके भविष्य को बेहतर दिशा देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
सौम्या पाण्डेय की इस पहल की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच भी उनकी संवेदनशील कार्यशैली की चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि एक अधिकारी द्वारा अपनी व्यस्तता के बावजूद किसी जरूरतमंद बच्चे की पढ़ाई के लिए समय निकालना समाज के लिए सकारात्मक संदेश है।
रिपोर्ट -अमित कुमार पत्रकार जनपद जालौन।
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