राधाकुण्ड में जल खेलनी तैराकी प्रतियोगिता 30 अगस्त को, दर्जनों युवा लेंगे भाग
प्रमुख समाजसेवी दिनेश कुमार मिश्रा और श्याम सुंदर मिश्रा के नेतत्व में विजेताओं को विभिन्न पुस्कार दिए जायेंगे.
गोवर्धन। द्वापर युग में श्रीराधाकृष्ण ने सखियों संग राधारानी कुंड में जल खेलनी (जलक्रीड़ा) लीला की. अब बृज के ग्वाला खेलेंगे. द्वापर युगीन लीलाओं को जीवांत करने लिए राधाकुण्ड के प्रमुख समाजसेवी दिनेश कुमार मिश्रा और श्याम सुंदर मिश्रा के नेतत्व में राधारानी कुंड पर प्रतिवर्ष की भांति जल खेलनी प्रतियोगिता का आयोजन 30 अगस्त रविवार को होगा. जिसमें आस पास के दर्जनों गाँव के युवा भाग लेंगे. विजेताओं को विभिन्न पुरस्कार दिए जाएंगे.
राधाकृष्ण की जल खेलनी (जलक्रीड़ा) ब्रज की उन सुंदर और पवित्र लीलाओं में से एक है, जिन्हें द्वापर युग में राधाकृष्ण यमुना के तट, गोवर्धन के राधाकुंड और बरसाना के कुंडों में साँखियों संग खेला करती थी. भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी सखियों के साथ पानी में जल कीड़ा लीला करना, गेंद फेंकना, एक-दूसरे पर जल छिड़कना और नौका विहार करना आदि लीला शामिल है।

जल खेलनी लीलाओं के मुख्य स्थल यमुना तट वृंदावन और गोकुल के पास यमुना के शांत जल में कन्हाई और राधारानी की जल विहार लीलाएं होती थीं। राधाकुंड में राधा-कृष्ण की नित्य जलक्रीड़ा और प्रेम का विशेष केंद्र माना जाता है। बरसाना के पीली पोखर, वृषभानु कुंड यहाँ भी राधा-कृष्ण जल में खेलने और झूलने के प्रसंग ब्रज संस्कृति का हिस्सा हैं। सांस्कृतिक महत्व दिव्य प्रेम: संत इसे जीव और ईश्वर के बीच के पवित्र और अनन्य प्रेम का प्रतीक मानते हैं ब्रज के उत्सवों और संगीत में इन लीलाओं का वर्णन पद, मल्हार के गीतों तथा रासलीला के माध्यम से किया जाता है।
दिनेश कुमार मिश्रा, आयोजक श्याम सुंदर मिश्रा, पवन मिश्रा और प्रभात मिश्रा ने बताया की राधाकुण्ड में द्वापर युगीन लीलाओं का निर्वाहन करते हुए तैराकी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है. जिसमें राधाकुण्ड, गोवर्धन, कुंजेरा, कोहनई मुखराई, बाँसोंती, जुलहेंदी, पाड़ल, नीमगाँव आदि गाँव के दर्जनों युवा सीनियर और जूनियर ग्रुप में भाग लेंगे. जिसमें विजेताओं को प्रशस्ति पत्र व चार बनर ग्लास गेस सटोव, तीन बनर ग्लास गेस सटोव दो बनर ग्लास गेस सटोव आदि सामान व नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।

