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स्पेशल रिपोर्ट:वीरांगना का शहर आज भी देता है शहीदों के परिजनों को सम्मान

 बुन्देलखण्ड यहाँ की एक कहावत है। बुन्देलों की सुनो कहानी बुन्देलों की बानी से

जी हां आज हम आपको बुन्देलखण्ड की एक ऐसी से रूबरू करवाने जा रहे है। जिसे सुन कर आप हैरत में पड़ जायेंगे और कही न कही गर्व महसूस करेंगे।

तो चलिए मेरे साथ बुन्देलखण्ड के
जनपद झांसी में बड़ागांव गेट बाहर एक शमशान घाट यानी मुक्तिधाम में जहाँ देश का लाल और शहीद चंद्रशेखर आजाद की मां स्व श्रीमती जगरानी देवीकी समाधी बनी हुई है।

जहाँ हर वर्ष स्व श्रीमती जगरानी देवी की समाधी पर हर पुण्यतिथि में संस्कार भारती के बैनर तले शहीद चंद्रशेखर की माँ को याद कर पुण्यतिथि मनायी जाती है। हालांकि देश की याददाश्त बहुत कमजोर होने के चलते लोग उनको भूल गये मगर झाँसी आज भी उनको याद करती है।

कहा जाता है कि एक वक्त शहीद चंद्रशेखर आजाद की मां की स्मारक 22 मार्च 1951 सदाशिव राव मलकापुरकर ने बनवाई थी और वक्त के बीतते स्मारक खस्ता हालत में हो चुकी थी उसका जीर्णोद्धार पूर्व पार्षद श्री जुगल किशोर शिवहरे के कार्यकाल में हुआ मगर तब से अब तक न किसी सरकार ने सुध ली और न किसी मंत्री ने मगर समाजसेवी आज भी देखरेख में लगे रहते है।अभी हाल ही में शहीद चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि मनाई गई थी ठीक उसी दिन उनकी माँ स्व श्रीमती जगरानी देवी की समाधि पर संस्कार भारती के बैनर तले एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। लोगों ने स्मारक पर दीप जलाकर पुष्प चढ़ाकर श्रीमती जगरानी देवी को याद किया ऐसे कार्यक्रम होने से युवाओं में देशभक्ति जागती है।

इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश राज्यमंत्री हरगोविंद कुशवाहा रहे इस मौके पर राज्य मंत्री ने जुगल किशोर शिवहरे पूर्व पार्षद को शॉल श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट की साथ ही वरिष्ठ पत्रकार मोहन नेपाली जी का भी सम्मान किया।साथ ही वरिष्ठ लोगों का भी सम्मान हुआ। कार्यक्रम का संचालन चित्रगुप्त श्रीवास्तव ने किया इस कार्यक्रम में कई गणमान्य लोगों ने श्रद्धा सुमन दीप जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

झांसी से क्राइम रिपोर्टर कमलेश चौबे के साथ टीम soni news

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