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प्रियंका की राजनीति फेल, दलित नरसंहार का इतिहास पढ़े कांग्रेस:डॉ. निर्मल

 

लखनऊ.

प्रियंका गांधी भी राहुल गांधी की तरह ही बिना सबूत और आंकड़े के बात करने लगी हैं। प्रियंका गांधी को दलित नरसंहार की तारीखें और वर्ष याद नहीं हैं। उन्हें यह भी शायद याद नहीं हैं कि उन तारीखों में किसके समर्थन से किसकी सरकार थी और सरकार ने क्या कार्रवाई की। ये बातें अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कही है।

डॉ. निर्मल ने प्रियंका गांधी के उत्तर प्रदेश में दलितों पर अत्याचार बढ़ने के मामले में पटलवार किया है। प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर कहा था कि यूपी में दलितों पर अपराध बढ़े हैं। डॉ. निर्मल ने कहा है कि प्रियंका को कांग्रेस और कांग्रेस समर्थित सरकारों के दौरान दलित नरसंहार के आंकड़े जुटाने चाहिए। प्रियंका को जब कोई मुद्दा नहीं मिल रहा है, तो वह दलितों की बात कर रही हैं। प्रियंका को कांग्रेस की सरकारों में दलित अत्याचार और नरसंहार का आंकड़ा लेकर बात करना चाहिए। यदि वह इस तरह की बे-बुनियाद बयानबाजी करेंगी, तो जनता उन्हें खुद ही आंकड़ा बता देगी।

योगी आदित्यनाथ अपराध और अपराधियों को लेकर सख्त हैं। डॉ. निर्मल ने कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दलित मित्र हैं। आज दलितों को आवास मिल रहे हैं। रोजगार मिल रहे हैं। दलितों का आर्थिक सशक्तिकरण हो रहा है वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं। उत्तर प्रदेश में दलित उत्पीड़न में कमी आई है। दलितों पर जुल्म करने वालों पर आजमगढ़ और जौनपुर जैसी सख्त कार्रवाई हो रही है। रासुका भी तामील करवाया जा रहा है।

डॉ. निर्मल ने कहा कि कांग्रेस ने तो डॉ. आंबेडकर को भारत रत्न तक नहीं दिया। आज उत्तर प्रदेश के सभी कार्यालयों में आंबेडकर की तस्वीर लगी हुई है, जो कांग्रेस आंबेडकर से इतना नफरत करती है कि उनको भारत रत्न नहीं देती, वह राजनीतिक दल सत्ता से बाहर होने पर दलित हित की बात कर रही है। गैरभाजपाई सरकारों में बेल्छी नरसंहार जो 1977 में पटना जिले में हुआ और 14 लोगों की हत्या कर दी गई थी। औरंगाबाद के मियांपुर नरसंहार में वर्ष 2000 में 35 लोगों की हत्या कर दी गई थी। लक्ष्मणपुर बाधेपुर नरसंहार में 85 लोगों की हत्या कर दी गई थी। सेनारी नरसंहार जो वर्ष 1999 में शंकरबीघा गांव में हुआ था। कांग्रेस को इसे भी देखना चाहिए। कांग्रेस की आरोप निराधार और राजनीति से प्रेरित है। हरियाणा के मिर्चपुर हिंसा को कौन भूल सकता है। इसी तरह से वर्ष 2005 में सोनीपत क्षेत्र में दलित कांड को कांग्रेस याद रखे। दलित कांग्रेस के पाले में जानेवाला नहीं है। प्रियंका गांधी भी बेवजह बयानबाजी पर उतर आई हैं और गलत आंकड़े दे रही हैं। प्रियंका की राजनीति फेल हो गई है।

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