सात भाषाओ में गाने वाली आवाज ने दुनिया को कहा अलविदा

मुम्बई/नालासोपारा- आज लोक संगीत के प्रेमियों के लिए दर्दनाक दिन साबित हुआ दरसल जब सुबह लोगो को पता चला की रेडियो सिंगर/स्टेज सिंगर श्री मती अरुमा शंकर गुप्ता का देहान्त हो गया है तो उनके चाहने वाले सतके में आ गए और सभी में शोक की लहर छा गयी,और फिर उनके घर पर लोगो का ताता लग गया ताकि उनके अंतिम संस्कार में उनके फैन शामिल हो सके
दरसल सिंगर अरुमा शंकर गुप्ता काफी दिनों से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से विगत दो वर्षो से पीड़ित चल रही थी और वो आज सुबह करीब सात बजे के करीब वो अपनी जिंदगी की जंग हार गयी और अपने सभी संगीत प्रेमियों को अलविदा कह दिया और अपने पीछे १२ वर्षीय बेटी दिव्यांशी को छोड़ गयी इस खबर से उनके फैन उनके अंतिम दर्शन के लिए उनके घर पहच गए उनकी अंतिम यात्रा कई बड़ी हस्तिया भी शामिल हुयी उनके पार्थिव शरीर को उनके पति आर एस गुप्ता ने मुखाग्नि दे कर उनको विदाई दी
                                                       सात भाषाओ में गाने वाली आवाज ने दुनिया को कहा अलविदा Soni News

                                                           सात भाषाओ में गाने वाली आवाज ने दुनिया को कहा अलविदा Soni News                     

                                                        -सात भाषाओ में करती थी गायन गए सैकड़ो गीत-

सात भाषाओ में गाने वाली आवाज ने दुनिया को कहा अलविदा Soni News
शुरुआत में गायिका अरुमा शंकर गुप्ता आकाशवाणी ग्वालियर से बुंदेली लोक गीत गया करती थी और बी हाई ग्रेट की सिंगर रही साथी टी सीरीज और कन्हैया कैसेट में भी दर्जनों गीत गए उन्हें बचपन से ही संगीत का शौक था उन्होंने संगीत से ऍम ऐ किया था फिर उन्होंने आकाशवाणी ग्वालियर के लिए पांच वर्ष गीत गाये फिर वर्ष 2005 में मुम्बई माया नगरी आयी और फिर धीरे धीरे उन्होंने भोजपुरी सिंगर के रूपमे अपने आपको स्थापित किया और खास बात ये भी है कि वो भाषाओ जैसे बुंदेली,भोजपुरी,राजस्थानी,हिंदी,मराठी,बंगाली,गुजरती भाषाओ में भी गायन करती थी

सात भाषाओ में गाने वाली आवाज ने दुनिया को कहा अलविदा Soni News

                                                                         -ऐसे पड़ा उनका नाम अरुमा-

सात भाषाओ में गाने वाली आवाज ने दुनिया को कहा अलविदा Soni News
जब सिंगर अरुमा शंकर गुप्ता मुंबई आयी तो कुछ दिन बाद उनके गुरु स्वर्गीय गीतेश दुवेदी उनसे मिलने मुंबई आये और उन्होंने ही उन्हें एक नया नाम दिया अरुमा और फिर धीर धीरे इसी नाम से उनकी पहचान बन गयी और उनके चाहने वाले उन्हें इसी नाम से पुकारने लगे

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