उरई की बेटी दिव्या को मिला राष्ट्रीय सम्मान

उरई की बेटी और यूनिसेफ की सलाहकार दिव्या गुप्ता को गुजरात के गांधीनगर में नौवें उदगम वीमेनस एचीवर्स अवार्ड्स समारोह में गोल्डन क़तर आर्मी वाइव्स एसोसिएशन (AWWA) की चेयरपर्सन डॉ० सोनिया पुरी तथा गुजरात-राजस्थान के ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर जियोफ वैन द्वारा समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह गुजरात में पिछले बीस वर्षों से सक्रिय संस्था उदगम द्वारा आयोजित किया गया। इसमें तेईस विशिष्ठ महिलाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु सम्मानित किया गया। इस सम्मान के लिए देश-विदेश में बसे भारतीय नागरिकों से तीन हजार के आसपास नोमिनेशन फॉर्म्स प्राप्त हुए थे, जिनमें से दिव्या गुप्ता का चयन सामाजिक कार्यों के लिए किया गया। अपने इस सम्मान को दिव्या ने सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं, विशेष रूप से बेटियों को समर्पित करते हुए कहा कि इससे लड़कियों को सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी। दिव्या मात्र चौदह वर्ष की उम्र से उरई में गहोई वैश्य मंच के साथ जुड़कर सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हो गई थी। इस मंच के द्वारा उन्होंने गरीब किन्तु होनहार बच्चों की शिक्षा के लिए धनराशि तथा अन्य आवश्यक मदद जुटाने का कार्य किया। दिव्या अभी भी जनपद से संचालित बिटोली अभियान और अनाज बैंक से सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं।
सामाजिक कार्य में परास्नातक डिग्री हासिल करने वाली दिव्या अपने विद्यार्थी जीवन से ही समाजसेवा में सक्रिय रही हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला, बाल-विकास, पेयजल, आपदा नियंत्रण, पर्यावरण सुरक्षा आदि क्षेत्रों में उनका कार्य अत्यंत गंभीर रहा है। दिव्या को मुख्य रूप से पहचान प्राकृतिक आपदाओं में पीड़ित नागरिकों की मदद करने के लिए मिली। असम, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, कश्मीर की बाढ़ रही हो या 2005 की सुनामी की तबाही, बंगाल के चक्रवात (2009) में लगभग 4500 परिवारों की मदद, उनके पुनर्वास, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सम्बन्धी व्यवस्था के साथ-साथ उनको जागरूक करने के कई-कई आयामों पर दिव्या एकसाथ काम कर रही थी। इसके अलावा वर्ष 2015 में नेपाल में भूकम्प-पीड़ित नागरिकों की मदद को दिव्या लम्बे समय तक नेपाल में रहकर अपने अनुभव का लाभ नेपाल के नागरिकों, प्रशासन को देती रहीं। दिव्या उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, असम, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र आदि राज्यों में कई संगठनों और सरकारी मशीनरी के साथ मिलकर कार्य कर चुकी हैं।
दिव्या लोगों को जागरूक करने का भी कार्य करती हैं। इस बारे में उनका कहना है कि लोगों की सहायता करने के साथ-साथ लोगों को इसके लिए भी जागरूक किया जाये कि भविष्य में किसी तरह का संकट आने पर, समस्या आने पर वे किसी दूसरे का इंतजार न करें वरन अपनी मदद करने के साथ-साथ अन्य दूसरों की मदद कर सकें। इस कार्य में वे अभी तक दस हजार से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षत कर चुकी हैं। समाज के लोगों में समाजसेवा के प्रति सकारात्मकता के उद्देश्य से दिव्या ने वर्ष 2016 में www.volunteerindians.org नामक वेबसाइट शुरू की। इसके माध्यम से लगभग चार सौ स्वयंसेवी जुड़ चुके हैं जो सत्रह हजार घंटों के आसपास का समय समाज को दे चुके हैं। इनके द्वारा नगर की सफाई, फुटपाथ स्कूल का सञ्चालन, सड़क किनारे रह रहे बच्चों की शिक्षा और भोजन की व्यवस्था, स्वास्थ्य जागरूकता, यातायात सञ्चालन में सहयोग, जरूरतमंद लोगों को वस्त्र-वितरण आदि कार्य किये जा रहे हैं। यह मंच न केवल गुजरात में बल्कि महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली आदि में सक्रिय है।
दिव्या गुप्ता वर्तमान में यूनिसेफ के साथ मिलकर गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ भारत मिशन की योजना, उसके निर्देशन, निरीक्षण आदि का कार्य कर रही हैं। अपनी भावी योजनाओं को साझा करते हुए दिव्या ने बताया कि यथाशीघ्र उनके द्वारा ग्रामीण महिलाओं के लिए एक बड़ा प्रोजेक्ट लाने का विचार है। इसके अंतर्गत ग्रामीण महिलाओं को कूड़ा-कचरा, अपशिष्ट आदि के प्रबंधन से आमदनी के प्रति प्रशिक्षित किया जायेगा। दिव्या ने अपने सामाजिक कार्यों की प्रतिबद्धता को निखारने में ऑक्सफेम, वाटर ऐड, एक्शन ऐड, यूनिसेफ, आदि के साथ-साथ विभिन्न राज्य सरकारों के अनेक विभागों के सहयोग को धन्यवाद दिया।

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