जालौन-एसिड की खुली बिक्री के विरोध में जन मिलन केंद्र में गोष्ठी

जालौन-एसिड अटैक की घटनाएँ मूलतः एकतरफा प्यार, विषमलिंगियों की दोस्ती के और आगे बढ़ने पर आई असहमति, अपने किसी प्रस्ताव के इंकार पर पुरुष द्वारा प्रतिक्रियास्वरूप सामने आती हैं। इन घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सरकार की तरफ से, प्रशासन की तरफ से एसिड की खुली बिक्री पर प्रतिबन्ध लगाया जाना चाहिए। उक्त विचार बुन्देलखण्ड जन मिलन केंद्र में पूर्व प्राचार्य और मनोवैज्ञानिक डॉ० अरुण कुमार श्रीवास्तव ने व्यक्त किये। वे आज बुन्देलखण्ड जन मिलन केंद्र में एसिड अटैक की घटनाओं और एसिड की खुली बिक्री के विरोध में चल रहे अभियान स्टॉप सेल एसिड के अंतर्गत आयोजित विचार गोष्ठी में अपने विचार प्रस्तुत कर रहे थे। उन्होंने इसके मनोवैज्ञानिक पक्ष पर बोलते हुए कहा कि यह एक तरह की विकृत मानसिकता है और इस पर कानून के साथ-साथ सामाजिक रूप से अंकुश लगाये जाने की आवश्यकता है। पूर्व प्राचार्य एवं रक्षा अध्ययन विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ० अभय करन सक्सेना ने अपने मित्र की पुत्री के साथ घटित एसिड अटैक की दुखद घटना सबके बीच रखते हुए बताया कि कैसे प्रशासनिक अधिकारी का लड़का अपने पिता के प्रभाव का इस्तेमाल करके इस अपराध को करने के बाद भी बच गया। जबकि वह लड़की बुरी तरह से निराश हो गई, हताश हो गई। ऐसे में समाज को चाहिए कि अपराधियों का बहिष्कार करे और तेजाबी हमले की पीडिता से साथ सहयोग करे।

जनपद में स्टॉप सेल एसिड अभियान को सबके बीच ले जाने वाले युवा सामाजिक कार्यकर्त्ता डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने बताया कि इस अभियान का सञ्चालन एसिड अटैक पीड़ित लक्ष्मी अग्रवाल द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नियमों, कानूनों का उल्लंघन करके खुलेआम हो रही एसिड की बिक्री को रुकवाना है। उच्चतम न्यायालय द्वारा आदेश जारी करने के बाद भी प्रशासन द्वारा सख्त कदम नहीं उठाये जा रहे हैं। बुन्देलखण्ड जन मिलन केंद्र के निदेशक, पूर्व प्राचार्य डॉ० आदित्य कुमार का कहना था कि प्रशासन को उच्चतम न्यायालय के आदेशों का सख्ती से पालन करवाया जाना चाहिए। माना कि घरेलू कामों सहित अन्य कामों में तेजाब की आवश्यकता होती है मगर यदि प्रशासन सख्ती से इसकी बिक्री पर ध्यान दे तो ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।

विडो क्लब की संचालिका कौशल्या राज ने कहा कि तेजाबी हमले की घटनाएँ संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। यह सिर्फ यही बताता है कि ऐसा व्यक्ति किसी से प्यार नहीं करता वरन उससे किसी न किसी तरह बदला लेना चाहता है। हम सभी को एसिड अटैक से पीड़ित के प्रति संवेदना रखनी चाहिए। उससे मिलकर उसमें विश्वास, आत्मसम्मान बढ़ाना चाहिए। विचार गोष्ठी में इस सम्बन्ध में एक ज्ञापन जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को देने के सम्बन्ध में सहमति बनी। इस विचार गोष्ठी में शरद श्रीवास्तव, विनोद खरे, रामश्री, बृजेन्द्र पाठक, डॉ० ए०के० मिश्रा, शालिनी, नैंसी, राजेश कुमार आदि ने उपस्थित होकर अपने विचार व्यक्त किये।
Soni news के लिए जनपद जालौन से रिपोर्टर क्राइम अमित कुमार के साथ रंजीत सिंह

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