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उत्तर प्रदेश

उ.प्र.के 2018-19 बजट में सरकार ने दलितों को किया गया नजरन्दाज – कुलदीप बौद्ध

2500करोड़ का दूसरे मदों में डायवर्जन,6000करोड़ आबादी के हिसाब से काट – 8500 करोड़ रुपये दलितों से छीना


उरई_जालौन, & उत्तर प्रदेश सरकार ने 2018-19 बजट पेश किया इसमें दलितों के लिये क्या..? इसको लेकर दलित बजट समीक्षा व अनुसूचित जाति उपयोजना(SCP) आवंटन एक अवलोकन व बजट विश्लेषण व मांग को लेकर बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच, दलित आर्थिक अधिकार आन्दोलन दुवारा सरकार सरकारगार्डन,उरई-जालौन में चर्चा/मीडिया संबाद किया !
यूपी सरकार का यह दूसरा व अब तक का सबसे बड़ा बजट 2018-19 आया है यूपी बजट के विश्लेषण को रखते हुए बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के संयोजक – कुलदीप कुमार बौद्ध ने कहा कि वित्त राज्यमंत्री श्री राजेश अग्रवाल जी ने रु 4, 28,384.52 करोड़ का बजट व्यय पेश किया है,जिसमे अनुसूचित जाति के लिए SCC के अंतर्गत- 25557.10 करोड़ दिये है, पहले यह बजट प्लान व नॉन प्लान अलग अलग आता था तो यूपी में दलितों की आवादी के हिसाब से 21% मिलना चाहिए था चुकी अब जब प्लान व नॉनप्लान बजट एक साथ आया है तो इस हिसाब से दलितों को 7.57% बजट मिलना चाहिए था जो कि 32428.71 करोड़ रूपये मिलने चाहिए था जबकि 25557.10 करोड़ रुपये ही दिया है, इस हिसाब से 6871.61 करोड़ रुपये कम दिया है? जो 25557.10 करोड़ रुपये दिया है उसमें से 2.5 हजार करोड़ रुपये दुसरे मदों में डायवर्जन किया है, जिससे दलितों का कोई लेना देना नहीं है, इस प्रकार 2.5 हजार करोड़ दुसरे मदों में डायवर्जन व 6000 करोड़ आबादी के हिसाब से कुल मिलाकर 8500 करोड़ से भी जयादा पैसा दलितों से छीना गया ही, ये तो इसी साल का हाल है यदि जब से SCP गाइड लाइन पिछले 40 साल से आई है उसका हिसाब लायेंगे तो बहुत बड़ा आंकड़ा सामने आयेगा? अगर इस वर्ष ही पैसा दलितों के लिए दिया गया होता तो कम से कम 1 लाख से ज्यादा दलित भूमिहीन परिवारों जमीन खरीद कार दी जा सकती, लाखों दलित युवाओं को रोजगार दिया जा सकता, लाखो दलित स्टूडेंट को स्कालरशिप देकर उनकी पढाई जारी रह सकती,मैला ढ़ोने बाले परिवारों का स्थाई पुनर्वासन हो सकता, बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र को मास्टर प्लान के तहत सुखा मुक्त किया जा सकता?


यूपी बजट 2018-19 पर टिप्पणी करते हुए मंच के साथी रिहाना मंसूरी व नंदकुमार,राजेश गौतम,ने कहा की सरकार महिलाओं के लिए बड़े बड़े बादे करती है लेकिन बजट में दलित महिलाओं के लिए कुछ भी नहीं है आज में हमारी दलित वाल्मीकि महिलाये मैला ढो कर अपने बच्चो का पेट भर परिवार का गुजर बसर करती है, दलित स्टूडेंट को समय से स्कालरशिप नहीं मिलती वही बुंदेलखंड से कई हजार दलित युवा रोजगार की तलाश में पलायन करके दुसरे प्रदेशों में जाते है, आखिर कब सुधरेगी दलितों की हालात जिस प्रकार से बजट की कटोती की जा रही है वो सामाजिक से ज्यादा आर्थिक अत्याचार दलितों के साथ किया जा रहा है जिस पर सबकी चुप्पी बनी हुई है, अब हम सबको मिलकर इस आर्थिक अत्याचार के खिलाफ़ बड़े पैमाने पर आन्दोलन करना होगा ! मीडिया संवाद में मीडिया के सबालों पर कृष्णकुमार प्रजापति(मणि सेवा संस्थान), शिवराम पाल(बुंदेलखंड पिछड़ा अधिकार मोर्चा),मनोज कुमार चौधरी( समता मूलक मंच),पंचमसिंह ( दलित स्टूडेंट लीडर), नीलिमा,किरण चौधरी( दलित महिला एक्टिविस्ट) ने सामूहिक रूप से उत्तर प्रदेश सरकार के इस साल के बजट पर बड़े सबाल उठाये व बजट में जो दलितों को नजर अंदाज किया है उसके लिए सामूहिक रूप में पूरे प्रदेश में जन आन्दोलन करने का भी एलान किया !

उ.प्र.2018–19 बजट व दलित – बजट हाईलाईटस- अनुसूचित जाति उपयोजना(SCP) आवंटन एक अवलोकन
• उत्तर प्रदेश सरकार का सत्र 2018 – 19 का कुल बजट – 428384.52 करोड़
• अनुसूचित जाति के लिए SCC के अंतर्गत जारी बजट – 25557.10 करोड़
• प्लान व नॉनप्लान बजट एक साथ आया है तो इस हिसाब से दलितों को 7.57% बजट मिलना चाहिए था जो कि 32428.71 करोड़ रूपये मिलने चाहिए था जबकि 25557.10 करोड़ रुपये ही दिया है, इस हिसाब से 6871.61 करोड़ रुपये दलितों को कम दिया है?
• दलितों को जो 25557.10 करोड़ रुपये दिया गया उसमे से 2.5 हजार करोड़ रूपये 68 से अधिक स्कीमों के अंतर्गत दुसरे मदों में डायवर्जन किया गया जिससे दलितों का कोई लेना देना नहीं है, न ही उससे सीधे तौर पर दलितों को लाभ पहुँचता है !
• 6 हजार करोड़ रुपये आबादी के हिसाब से कम दिया गया !
• इस साल के बजट में बहुत ही कम सकीम ऐसे है जिनसे दलितों को सीधा लाभ पहुंचेगा !
• इस वर्ष के बजट में ज्यादातर स्कीम पुरानी ही है कुछ को बंद भी किया गया है !
• सरकार की कुछ अच्छी स्कीम जिसके लिए धन्यवाद लेकिन उनमे बजट बहुत ही कम दिया गया है !

हमारी माँग है:
1. उत्तर प्रदेश में भी कर्नाटका,तेलंगाना,आंध्राप्रदेश की तरह अनुसूचित जाति घटक और अनुसूचित जनजाति घटक को कानून बनाया जाये !
2. इस वर्ष 20118 -19 के बजट में 2.5 हजार करोड़ रुपये की धनराशी को जो दुसरे मदों में डायवर्जन की गई है उसे वापस किया जाये
3. दलितों के सीधे विकास के लिए योजनायें बने जाये जिससे दलितों का सीधा विकास हो ! व एस.सी.पी./टी.एस.पी. गाईड लाइन का पूर्णतया अनुपालन किया जाये !इस मौके पर  उपस्तिथि – (कुलदीप कुमार बौद्ध) (रिहाना मंसूरी) (कृष्णकुमार प्रजापति) (राजेश गौतम ) ( नंदकुमार ) (पंचम सिंह )( रुखसाना)(मनोज कुमार) ( टी.डी.शाक्यवार) (शिवराम पाल) (नीलिमा) (संघरत्ना) (किरण चौधरी)

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