उरई-अंध विद्यालय के नेत्रहीन शिक्षकों और विद्यालय की प्रबंध समिति के बीच का विवाद आखिर सुलझ ही गया

 

उरई शहर के मोहल्ला शांतिनगर में श्री शिव अखंड ज्योति गंगादीन स्पर्श प्राथमिक विद्यालय नाम से संचालित अंध-विद्यालय के नेत्रहीन शिक्षकों और विद्यालय की प्रबंध समिति के बीच का विवाद लम्बे समय बाद सुलझ गया. दोनों पक्षों ने अपर जिलाधिकारी कार्यालय में उपस्थित होकर अपर जिलाधिकारी महोदय के समक्ष सहमति से इस मामले का निपटारा किया. प्रबंध समिति द्वारा दोनों शिक्षकों में प्रत्येक को को चालीस हजार रुपये की चेक और दस हजार रुपये नकद दिए गए. समिति की तरफ से नए शिक्षकों को जल्द लाने और नवीन भवन को अगस्त माह से आरम्भ करने का भरोसा व्यक्त किया. प्रबंध समिति इन दोनों शिक्षकों के कार्यों से असहमति व्यक्त करते हुए उन दोनों को विद्यालय में कार्यरत रहने पर असमर्थता व्यक्त की. जिस पर दोनों शिक्षकों ने अंध-विद्यालय को छोड़ना स्वीकार किया. इस अवसर पर नेत्रहीन शिक्षकों की समस्याओं को लगातार उठाने वाले डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर, रोहित त्रिपाठी, रोहित विनायक तथा अंध-विद्यालय की प्रबंध समिति की तरफ से प्रबंधिका पति गंगादीन प्रजापति, समिति कोषाध्यक्ष नरेन्द्र कुमार, हिमांशु उपस्थित रहे. अंध-विद्यालय छोड़ने वाले दोनों नेत्रहीन शिक्षकों और विद्यार्थियों के आवास की व्यवस्था इस प्रकरण से जुड़े समाजसेवियों द्वारा जल्द किये जाने का आश्वासन दिया गया.

उरई-अंध विद्यालय के नेत्रहीन शिक्षकों और विद्यालय की प्रबंध समिति के बीच का विवाद आखिर सुलझ ही गया Soni News

अंध विद्यालय की प्रबंध समिति गंगादीन दिव्यांग सेवा समिति पर वर्तमान भवन को बेचने और अंध-विद्यालय के नाम से बनाये गए नवीन भवन में विद्यालय स्थानांतरित न करने, अंध-विद्यालय के नेत्रहीन शिक्षकों तेजपाल राजपूत और दीपक कुमार का वेतन न देने, अंध-विद्यालय में अध्ययनरत नेत्रहीन विद्यार्थियों की समुचित देखभाल न करने जैसे आरोप लगे हुए थे. इसके साथ-साथ प्रबंध समिति पर नवीन भवन के नाम पर विधायक निधि का दुरुपयोग किये जाने का भी आरोप लगा हुआ था. प्रबंध समिति ने एक विधान परिषद् सदस्य और एक विधानसभा सदस्य की विधायक निधि को नवीन भवन के लिए आवंटित करवा रखा था, जबकि भवन को न तो पूर्ण ही करवाया गया और न ही उसके लिए प्रयास किये जा रहे थे. वर्तमान भवन की स्थिति भी अत्यंत थी, जिसमें रह रहे दिव्यांग शिक्षाओं और विद्यार्थियों की जान को खतरा बराबर बना रहता था.

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इस मामले की गंभीरता को समझते हुए युवा समाजसेवी डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कई बार नेत्रहीन शिक्षकों, विद्यार्थियों की तरफ से प्रशासन को, जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भी दिलवाए. इसके बदले उनको सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे. इसके साथ-साथ प्रबंध समिति द्वारा विधायक निधि के दुरुपयोग की शिकायत भी उच्च स्तर पर डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर द्वारा की गई. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने इस मामले में सक्रियता दिखाई. इसी क्रम में सनातन बालिका महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ० अमिता सिंह द्वारा भी कई बार लिखित शिकायत की गई. रोहित विनायक और उनके साथियों द्वारा भी इस मामले में लगातार सक्रियता दिखाई गई और उनके द्वारा भी इस मामले की शिकायत की गई. समाज के गणमान्य लोगों के द्वारा किये जा रहे प्रयासों के बाद जून माह में अपर जिलाधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला दिव्यांग सशक्तिकरण अधिकारी द्वारा अंध विद्यालय का निरीक्षण किया गया था. स्थलीय जाँच के बाद दोनों पक्षों को बैठाकर विभिन्न बिन्दुओं पर सहमति बनवाई गई थी.

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